देहरादून 11जून 2026। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) और उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के संयुक्त तत्वावधान में मानसून पूर्व तैयारियों पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों, जिला प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।
मुख्य अतिथि राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि आपदा प्रबंधन में आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान का भी उपयोग आवश्यक है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक को प्रथम प्रतिक्रियादाता के रूप में प्रशिक्षित करने तथा ग्राम स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण गतिविधियों को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने पूर्व सैनिकों के अनुभव और अनुशासन को भी आपदा प्रबंधन में उपयोगी बताया।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और अधिकारियों को नवीनतम तकनीकों एवं सर्वोत्तम प्रथाओं से अवगत कराना है। प्रशिक्षण में अर्ली वार्निंग सिस्टम, जोखिम मूल्यांकन, बाढ़ प्रबंधन, शहरी बाढ़, स्वास्थ्य तैयारी, जलवायु परिवर्तन, तकनीकी नवाचार और त्वरित क्षति आकलन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की जा रही है।
इस दौरान विनोद कुमार सुमन ने नदी-नालों, झरनों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सेल्फी व रील्स बनाने के बढ़ते चलन पर चिंता व्यक्त करते हुए ऐसे स्थानों को “नो सेल्फी जोन” घोषित करने, चेतावनी बोर्ड लगाने और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
एनआईडीएम के प्रो. नवनीत कुमार ने जलवायु परिवर्तन से बढ़ते आपदा जोखिमों, सैटेलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग तकनीक और अर्ली वार्निंग सिस्टम की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को सचेत ऐप, दामिनी ऐप और आईएमडी की रियल टाइम मौसम संबंधी सेवाओं की जानकारी भी दी। वहीं यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार ने भूस्खलन पूर्वानुमान और न्यूनीकरण के लिए चल रहे प्रयासों पर जानकारी साझा की।
