मुंबई, 29 जुलाई 2026।
उत्तराखंड सरकार के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार गैरोला ने मुंबई प्रवास के दौरान संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, शोध एवं डिजिटल नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों और महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इस दौरान संस्कृत शिक्षा को तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), शोध और प्रशासनिक उपयोग से जोड़ने पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।





सोमैया विद्याविहार विश्वविद्यालय में संस्कृत शिक्षण पर मंथन
सोमैया विद्याविहार विश्वविद्यालय के के.जे. सोमैया इंस्टीट्यूट ऑफ धर्म स्टडीज़ में आयोजित बैठक में कुलपति डॉ. अजय कपूर, डॉ. भाग्यश्री बावरे, डॉ. प्रसाद भिड़े, प्राची पाठक एवं बालासाहेब वाघ सहित अन्य शिक्षाविदों ने भाग लिया।
बैठक में भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत शिक्षा के सुदृढ़ीकरण, प्रमाणपत्र से लेकर पीएचडी स्तर तक के पाठ्यक्रमों, संस्कृत को संस्कृत माध्यम से पढ़ाने, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा संस्कृत प्रमोशन फाउंडेशन के सहयोग से शिक्षकों के प्रशिक्षण पर चर्चा हुई। साथ ही नाट्यशास्त्र एवं परफॉर्मिंग आर्ट्स के माध्यम से संस्कृत के प्रचार-प्रसार तथा सोमैया विश्वविद्यालय और उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के बीच एमओयू का प्रस्ताव भी रखा गया।
मुंबई विश्वविद्यालय में शोध एवं डिजिटल शिक्षा पर जोर
मुंबई विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में विभागाध्यक्ष डॉ. सुचित्रा ताजाणे एवं अन्य प्राध्यापकों के साथ हुई बैठक में संस्कृत व्याकरण, भाषाविज्ञान, अंतर्विषयक शोध, संगीत चिकित्सा, मंत्र आधारित अनुसंधान तथा सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप एक्शन रिसर्च पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में संस्कृत भारती एवं केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने, उच्च गुणवत्ता वाले ऑनलाइन संस्कृत पाठ्यक्रम (MOOCs) विकसित करने तथा डिजिटल स्टूडियो स्थापित करने का सुझाव दिया गया। विभाग ने इन पहलों के लिए वित्तीय सहयोग एवं अनुदान का भी आग्रह किया। इस अवसर पर विभाग की ओर से दीपक कुमार गैरोला को विभागीय प्रकाशन ‘गौरीगौरवम्’ भेंट कर सम्मानित किया गया।
IIT बॉम्बे में AI और संस्कृत पर चर्चा
आईआईटी बॉम्बे में आयोजित बैठक में निदेशक, डॉ. मल्हार कुलकर्णी, फैकल्टी सदस्यों एवं शोधार्थियों के साथ संस्कृत और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर विस्तृत चर्चा हुई।
इस दौरान ‘संस्कृत शब्द मित्र’ पायलट प्रोजेक्ट, संस्कृत वर्डनेट (संस्कृत शब्दबन्ध), भारतजेन पहल तथा सेंटर फॉर ट्रेडिशनल इंडियन नॉलेज सिस्टम्स (CTIKS) के कार्यों की प्रस्तुति दी गई। बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स, डिजिटल ह्यूमैनिटीज़ और भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणाली के क्षेत्र में संयुक्त शोध को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।
दीपक कुमार गैरोला ने मंत्र चिकित्सा एवं प्रज्ञा चक्षु जैसे विषयों पर वैज्ञानिक एवं अंतर्विषयक अनुसंधान की आवश्यकता पर भी बल दिया।
महाराष्ट्र सरकार के साथ प्रशासन में संस्कृत के उपयोग पर विचार
मुंबई प्रवास की अंतिम बैठक महाराष्ट्र सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में प्रशासनिक अधिकारी डॉ. मंजुषा कुलकर्णी के साथ हुई।
बैठक में शासन एवं प्रशासन में संस्कृत शब्दावली के उपयोग, सरकारी पत्राचार, जनजागरूकता कार्यक्रमों, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म, संस्कृत भाषी परिवारों की अवधारणा तथा शिक्षा एवं सांस्कृतिक संस्थानों के सहयोग से संस्कृत को जनजीवन में अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। डॉ. मंजुषा कुलकर्णी ने दीपक कुमार गैरोला को अपनी लिखित संस्कृत पुस्तक एवं उसका अनूदित संस्करण भेंट कर सम्मानित किया।
संस्कृत के लिए साझा संकल्प
सभी बैठकों में संस्कृत शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित भाषा तकनीक, अंतर्विषयक शोध तथा संस्थागत सहयोग को मजबूत करने पर सहमति बनी। साथ ही संस्कृत को शिक्षा, शोध, प्रशासन और समाज में व्यवहारिक रूप से अधिक उपयोगी एवं सशक्त भाषा बनाने के लिए भविष्य में संयुक्त परियोजनाओं पर कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया गया।
