नई दिल्ली/देहरादून, 5 जून 2026। उत्तराखण्ड शासन के सचिव (संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन) दीपक कुमार के नेतृत्व में 1 से 3 जून 2026 तक नई दिल्ली में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, संस्थानों और विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं। बैठकों में संस्कृत शिक्षा के संवर्धन, भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार, नई शैक्षिक परियोजनाओं और कार्यक्रम क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की महानिदेशक के साथ हुई बैठक में उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार द्वारा भारतीय संस्कृति, कर्मकाण्ड, ज्योतिष, जन्मपत्रिका निर्माण तथा भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित त्रैमासिक एवं षाण्मासिक ऑनलाइन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू करने पर सहमति बनी। इन पाठ्यक्रमों के वैश्विक प्रचार-प्रसार और नामांकन में ICCR सहयोग करेगा। इससे संस्कृत के क्षेत्र में देश-विदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना जताई गई। साथ ही विदेश मंत्रालय के ICCR प्रभाग के सहयोग से 20 और 21 दिसंबर 2026 को हरिद्वार में विश्व ध्यान दिवस आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में संस्कृत के विद्वानों और शिक्षकों के लिए विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा संस्कृत साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों के विभिन्न भाषाओं में अनुवाद को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ हुई चर्चा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित परियोजनाओं को भारत AI मिशन के अंतर्गत प्रस्तुत करने तथा संस्कृत शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने की संभावनाओं पर मंथन हुआ।
संस्कृति मंत्रालय में विश्वविद्यालय की ओर से राजमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन एवं योगदान पर आधारित एक महत्वपूर्ण शोध परियोजना आर्थिक सहायता के लिए प्रस्तुत की गई। इसके अलावा उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान पंडित दिनेश जोशी की जन्मशती के अवसर पर हरिद्वार में संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
शिक्षा मंत्रालय के साथ हुई बैठक में उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा परिषद, देहरादून के डिजिटलीकरण को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। वहीं, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी के साथ हुई बैठक में उत्तराखण्ड में संस्कृत शिक्षा के विस्तार, पुस्तकालय विकास, संस्कृत शिक्षण केंद्रों की स्थापना तथा संस्कृत ग्रामों को सुदृढ़ बनाने की योजनाओं पर विचार किया गया। साथ ही किसी एक जनपद को पायलट परियोजना के रूप में संस्कृत आच्छादित क्षेत्र के रूप में विकसित करने का सुझाव भी सामने आया। विश्वविद्यालय में उपलब्ध छात्रवृत्तियों एवं शोधवृत्तियों की जानकारी भी साझा की गई।
इस दौरान दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट के साथ शिष्टाचार भेंट में उत्तराखण्ड और दिल्ली के बीच संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने उत्तराखण्ड में संस्कृत शिक्षा के विकास के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
बैठकों में उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. प्रकाश चंद्र पंत, डॉ. सुमन प्रसाद भट्ट तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सुनील जोशी भी उपस्थित रहे।
बैठकों के समापन पर सचिव दीपक कुमार ने संबंधित संस्थाओं को लिए गए निर्णयों पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि संस्कृत शिक्षा, शोध और भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक विस्तार के लिए नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त हो सके।





