देहरादून/नई दिल्ली, 4 जून 2026। उत्तराखण्ड सरकार के संस्कृत शिक्षा, कार्यक्रम क्रियान्वयन एवं जनगणना विभाग के सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली में भारत में लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविचिएने से शिष्टाचार भेंट कर संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके प्रसार को लेकर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में दीपक कुमार ने उत्तराखण्ड की विशिष्ट पहचान का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने राजदूत को राज्य में संचालित संस्कृत शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों तथा संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अगस्त 2025 में सभी 13 जनपदों में एक-एक संस्कृत ग्राम स्थापित किए हैं, जहां दैनिक जीवन में संस्कृत का प्रयोग किया जाता है।
सचिव ने राजदूत को किसी संस्कृत ग्राम के भ्रमण के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि इससे उन्हें संस्कृत के जीवंत स्वरूप को निकट से देखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने लिथुआनिया के प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान वितिस विदूनास के संस्कृत अध्ययन एवं अनुसंधान में योगदान की भी सराहना की।
इस अवसर पर राजदूत डायना मिकेविचिएने ने दीपक कुमार को संस्कृत और लिथुआनियाई भाषाओं के 108 समान शब्दों पर आधारित एक विशेष शब्दकोश भेंट किया। उन्होंने बताया कि दोनों भाषाओं में ध्वनि और अर्थ की समानता प्राचीन सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संबंधों की ओर संकेत करती है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि प्रो. विदूनास एक विस्तृत संस्कृत शब्दकोश पर कार्य कर रहे हैं, जिसमें एक हजार से अधिक समानार्थी शब्दों का संकलन किया जा रहा है।
राजदूत ने कहा कि यह कार्य तुलनात्मक भाषाविज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देगा तथा भारत और लिथुआनिया के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगा।
उल्लेखनीय है कि विल्नियस विश्वविद्यालय में कई दशकों से हिन्दी और संस्कृत का अध्ययन-अध्यापन किया जा रहा है। वर्ष 1996 में वहां भारतीय अध्ययन केन्द्र की स्थापना भी की गई थी।
बैठक में डॉ. सुनील जोशी भी उपस्थित

