देहरादून/नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026। उत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन सचिव दीपक कुमार ने प्रतिष्ठित संस्कृत विद्वान, दार्शनिक एवं आध्यात्मिक चिंतक स्वामी भद्रेश दास से अक्षरधाम में शिष्टाचार भेंट की। स्वामी भद्रेश दास को के.के. बिड़ला फाउंडेशन द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रतिष्ठित सरस्वती सम्मान एवं साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक महत्वपूर्ण सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
भेंट के दौरान सचिव दीपक कुमार ने अक्षरधाम में आयोजित विशेष समारोह में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा स्वामी भद्रेश दास को प्रदान किए गए ‘वेदविद्याविश्वगुरु’ पुरस्कार के लिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने संस्कृत भाषा तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार में स्वामी भद्रेश दास के योगदान की सराहना की।
दीपक कुमार ने उत्तराखंड के लिए 10 अगस्त के विशेष महत्व का उल्लेख करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश के सभी 13 जिलों में स्थापित 13 संस्कृत ग्रामों के माध्यम से संचालित संस्कृत संवर्धन अभियान के एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राज्यभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य जमीनी स्तर पर संस्कृत के अध्ययन, दैनिक जीवन में प्रयोग तथा इसके प्रचार-प्रसार को और अधिक सुदृढ़ करना है। उल्लेखनीय है कि संस्कृत को उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त है।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित उत्तराखंड संस्कृत आयोग का गठन शीघ्र किए जाने की संभावना है। आयोग के माध्यम से राज्य में संस्कृत भाषा के समग्र विकास और संवर्धन के लिए एक व्यापक संस्थागत ढांचा तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य युवा विद्यार्थियों को संस्कृत के विशाल शास्त्रीय साहित्य, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा उच्च शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार के आधुनिक अवसरों से जोड़ना होगा।
भेंट के दौरान स्वामी भद्रेश दास ने आगामी महीनों में उत्तराखंड आने तथा उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्कृत विषय के प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के साथ संवाद करने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने संस्कृत ग्रामों से जुड़े विद्यार्थियों एवं अन्य लाभार्थियों से भी संवाद कर संस्कृत सीखने और उसके प्रयोग से जुड़े उनके अनुभवों को जानने में रुचि दिखाई।
स्वामी भद्रेश दास ने यह भी बताया कि स्वामिनारायण रिसर्च इंस्टीट्यूट उत्तराखंड के विभिन्न संस्कृत संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने के लिए इच्छुक है। इन एमओयू के माध्यम से शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने तथा राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
भेंट के दौरान संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन, भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने तथा संस्कृत को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने के लिए भविष्य में किए जाने वाले संभावित प्रयासों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

