देहरादून 8 सितंबर 2026। ग्लेशियर झीलों से संभावित जोखिम कम करने और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से चमोली स्थित सरस्वती ताल और उत्तरकाशी स्थित केदारताल के सर्वेक्षण के लिए विशेषज्ञ दल मंगलवार को रवाना हुआ। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने यूएसडीएमए से दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने दल को शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर उनकी वर्तमान स्थिति, जलस्तर, आकार में बदलाव और संभावित जोखिमों का आकलन किया जा रहा है। संभावित खतरे की स्थिति में समय पर चेतावनी पहुंचाने के लिए आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण और संचार प्रणाली की व्यवस्था की जाएगी।
आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षित निकासी मार्ग, चेतावनी तंत्र और राहत-बचाव की तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है।
सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखंड में 13 संवेदनशील ग्लेशियर झीलें चिन्हित हैं, जिनमें से चार का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। अब सरस्वती ताल और केदारताल का बैथीमेट्री सर्वेक्षण किया जाएगा। सरस्वती ताल करीब 5700 मीटर और केदारताल करीब 4750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
सर्वेक्षण दल में यूएसडीएमए, यूएलएमएमसी, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, एनआईएच रुड़की, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के विशेषज्ञ शामिल हैं। दल झीलों की स्थिति, संभावित जोखिम और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन करेगा।
