देहरादून 1 सितंबर 2026। यूएन वूमेन द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘शी लीड्स उत्तराखंड’ कार्यशाला में डॉ. सुनीता विद्यार्थी ने ‘शी लीड्स’ एलुमनाई एवं वक्ता के रूप में प्रतिभाग किया। उत्तराखंड में इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए अपने विशेष आग्रह को स्वीकार किए जाने पर उन्होंने यूएन वूमेन की टीम का आभार व्यक्त किया।
अपने संबोधन में डॉ. सुनीता विद्यार्थी ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए किसी के सहारे का इंतजार करने के बजाय स्वयं को एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत करना होगा। जब तक महिलाएं अपनी राजनीतिक क्षमता और नेतृत्व को मजबूती से सामने नहीं रखेंगी, तब तक उन्हें स्वतः पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाएगा।
उन्होंने ‘पिक एंड चूज़’ और ‘सिलेक्टिव एंपावरमेंट’ की राजनीति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी एक महिला चेहरे को आगे कर प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व दिखाने की प्रवृत्ति से ऊपर उठकर अधिक से अधिक महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है।
डॉ. विद्यार्थी ने कहा कि राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी है कि वे महिलाओं को जमीनी स्तर पर तैयार करें और उन्हें वास्तविक चुनावी अवसरों से जोड़ें।
कार्यशाला की खास बात यह रही कि इसमें सभी राजनीतिक दलों से जुड़ी 53 महिला प्रतिनिधियों को भाग लेने का अवसर मिला। इनमें ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत सदस्य, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और पूर्व नगर निगम मेयर सहित विभिन्न स्तरों की महिला जनप्रतिनिधियां शामिल रहीं। डॉ. सुनीता विद्यार्थी ने इन सभी महिलाओं को कार्यक्रम से जोड़ने के लिए विशेष रूप से अनुशंसा की थी।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को एक साझा मंच पर लाकर उनके कौशल विकास, नेतृत्व क्षमता और चुनाव से जुड़ी बारीकियों एवं सावधानियों की जानकारी देना इस कार्यशाला की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
डॉ. सुनीता विद्यार्थी ने दो दिवसीय प्रशिक्षण के सफल आयोजन के लिए श्रीमती कांता सिंह, काव्या, श्री हमराज सिंह और यूएन वूमेन की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यही रही कि राजनीतिक विचारधाराओं से अलग सभी दलों की महिला प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया। यही पहल डॉ. सुनीता विद्यार्थी के समावेशी महिला नेतृत्व और राजनीतिक सशक्तिकरण के दृष्टिकोण को अलग पहचान देती है।
