विकास योजनाओं, जनकल्याण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान।
गैरसैंण (भराड़ीसैंण), 27 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को प्रेस वार्ता में कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक उत्तराखंड को विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना है। वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट इसी उद्देश्य से तैयार किया गया है, जिसमें विकास योजनाओं के साथ जनकल्याण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद लगभग 2.55 लाख करोड़ रुपये था, जो 2026-27 में बढ़कर 3.82 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। प्रति व्यक्ति आय में भी वृद्धि हुई है। राज्य में स्टार्टअप की संख्या 702 से बढ़कर 1,978 और एमएसएमई इकाइयों की संख्या लगभग 60 हजार से बढ़कर एक लाख हो गई है। नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखंड ने 79 अंकों के साथ संयुक्त रूप से देश में पहला स्थान हासिल किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अनुपूरक बजट में कुल 7,844.18 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें 4,164.32 करोड़ रुपये पूंजीगत और 3,679.86 करोड़ रुपये राजस्व मद में रखे गए हैं। स्थानीय निकायों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए 721 करोड़ रुपये, किसानों से धान-गेहूं खरीद के लिए 1,100 करोड़ रुपये, आधारभूत ढांचे के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये और जल जीवन मिशन के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा दिव्य कुंभ की व्यवस्थाओं के लिए करीब 290 करोड़ रुपये, गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना के लिए 122 करोड़ रुपये, अटल आयुष्मान योजना के लिए 100 करोड़ रुपये और कर्मचारियों की गोल्डन कार्ड योजना के लिए 125 करोड़ रुपये रखे गए हैं। चिकित्सा शिक्षा के लिए लगभग 160 करोड़ रुपये तथा शिक्षा में डिजिटल लर्निंग के लिए 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं, महिलाओं, किसानों, खिलाड़ियों और जरूरतमंदों से जुड़ी योजनाओं को भी प्राथमिकता दी गई है। आपदा प्रबंधन, सुरक्षित निर्माण, सड़क और हेली सेवाओं के विकास के साथ आईटी एवं स्टार्टअप क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जनभागीदारी के साथ विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। लक्ष्य है कि आर्थिक प्रगति का लाभ गांवों, किसानों, महिलाओं और युवाओं सहित समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उत्तराखंड विकसित एवं आत्मनिर्भर राज्य बने।
