देहरादून, 11 अगस्त 2026: उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में “13 जनपद–13 संस्कृत ग्राम” पहल के एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली स्थित रॉयल थाई एम्बेसी में भारत में थाईलैंड की राजदूत चावनार्ट थांगसुम्फंत से शिष्टाचार भेंट की।
बैठक में दीपक कुमार ने बताया कि 10 अगस्त को उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में संस्कृत ग्रामों की स्थापना का एक वर्ष पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि यह पहल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसका उद्देश्य संस्कृत को प्रत्येक घर तक पहुंचाकर समाज की जीवंत भाषा बनाना है। उन्होंने संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन में उत्तराखंड की भूमिका और वर्ष 2010 में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिए जाने की जानकारी भी दी।
भारत और थाईलैंड के बीच साझा सभ्यतागत विरासत तथा रामायण परंपरा पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों की रामायण परंपराओं के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान की व्यापक संभावनाएं हैं। थाई रामायण की पारंपरिक प्रस्तुतियों और उत्तराखंड की कुमाऊँनी, गढ़वाली एवं जौनसारी रामलीला परंपराओं को साझा मंच पर लाने का प्रस्ताव भी रखा गया।
उन्होंने सुझाव दिया कि औपचारिक समझौता ज्ञापन से पहले उत्तराखंड के संस्कृत संस्थानों और थाईलैंड के विश्वविद्यालयों में संस्कृत के प्रोफेसरों एवं विद्वानों के बीच ऑनलाइन शैक्षणिक संवाद शुरू किया जा सकता है। साथ ही थाईलैंड में संस्कृत, पालि एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन-अध्यापन से जुड़े संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग की संभावनाएं तलाशने का प्रस्ताव रखा।
दीपक कुमार ने आगामी थाई रामायण प्रस्तुति के कलाकारों को उत्तराखंड के संस्कृत ग्रामों का भ्रमण कराने तथा उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् के सहयोग से हरिद्वार में भव्य रामायण सांस्कृतिक प्रस्तुति आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे।
थाई राजदूत और डिप्टी चीफ ऑफ मिशन एवं मंत्री किरण मूंगटिन ने उत्तराखंड सरकार के संस्कृत प्रचार-प्रसार के प्रयासों की सराहना करते हुए शैक्षणिक, सांस्कृतिक और संस्कृत संबंधी सहयोग की संभावनाएं तलाशने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
उल्लेखनीय है कि थाईलैंड का संस्कृत अध्ययन से दीर्घकालीन संबंध रहा है। थाई राजपरिवार की राजकुमारी महा चक्री सिरिंधोर्न प्रतिष्ठित संस्कृत विदुषी हैं और विश्व संस्कृत पुरस्कार से सम्मानित हैं। थाईलैंड ने वर्ष 2015 में बैंकॉक में 16वें विश्व संस्कृत सम्मेलन की मेजबानी भी की थी। वहीं, संस्कृत विद्वान प्रोफेसर चिरापत प्रपंडविद्या को वर्ष 2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद द्वारा थाईलैंड में संस्कृत के लिए चेयर की स्थापना भी दोनों देशों के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत कर रही है।


