देहरादून, 16 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखण्ड में उच्च स्तरीय संस्कृत आयोग के गठन को लेकर सचिवालय में उच्च स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक में आयोग की संरचना, उद्देश्य और कार्ययोजना पर देशभर के संस्कृत विद्वानों, कुलपतियों और शिक्षाविदों ने विस्तृत सुझाव दिए।





बैठक की अध्यक्षता संस्कृत शिक्षा सचिव श्री दीपक कुमार ने की। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड में संस्कृत को वर्ष 2010 में द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया गया था और राज्य सरकार संस्कृत के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप आयोग की रूपरेखा तैयार करने की प्रक्रिया जारी है।
बैठक में सुझाव दिया गया कि आयोग केवल संस्कृत भाषा तक सीमित न रहकर भारतीय ज्ञान परम्परा, वैदिक अध्ययन, अनुसंधान, कौशल विकास, रोजगारोन्मुखी शिक्षा और नवाचार को भी बढ़ावा दे। साथ ही ‘संस्कृत विजय यात्रा’, विश्वविद्यालयों में संस्कृत एवं हिन्दू अध्ययन विभाग, संस्कृत अनुवादकों की नियुक्ति, संवादात्मक संस्कृत शिक्षण केन्द्र, पाली-प्राकृत अध्ययन तथा संस्कृत में डिजिटल सामग्री और फिल्मों को प्रोत्साहन जैसे सुझाव भी दिए गए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आयोग के गठन और उसकी कार्ययोजना को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही राज्यपाल, मुख्यमंत्री और भारत के मुख्य न्यायाधीश से भेंट करेगा। बैठक में देशभर के प्रमुख संस्कृत विश्वविद्यालयों के कुलपति, विद्वान, शिक्षाविद और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
